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कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में 76% की बेतहाशा मूल्य वृद्धि पर गुलाटी ने केन्द्र की मोदी सरकार को असंवेदनशील करार दिया।



नई दिल्ली: 

पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने आज केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में 76% तक की गई बेतहाशा वृद्धि की तीखी और कटु आलोचना की है।

आज प्रेस सहित अपने ब्लाग पर जारी बयान में गुलाटी ने कहा कि फरवरी 2026 में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹ 1,740.50 हुआ करती थी।

जो आज बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव निपट जाने के बाद 1 मई 2026 को बढ़कर ₹ 3,071.50 हो गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गैस के दामों में 76% की बेतहाशा वृद्धि इस बात का संकेत है कि उसकी इन कंपनियों के साथ सांठ-गांठ है और उसने तेल और गैस कंपनियों को आम आदमी को लूटने, उनकी जेब पर डाका डालने की की खुली छूट दे दी है। 

गुलाटी ने कहा कि पहले से ही ज़बरदस्त महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी की सरकार के इस कदम से कमर टूटना निश्चित है।

उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने निश्चित रूप से वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है, लेकिन घरेलू स्तर पर इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर छोटे व्यापारियों और आम जनता पर पड़ेगा।

गुलाटी ने कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 76% के इस भारी उछाल के चलते, छोटे रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग व्यवसाय और हलवाई जो मुख्य रूप से कमर्शियल गैस का उपयोग करते हैं, उनकी लागत अचानक से काफी बढ़ जाएगी।

उन्होंने कहा कि इससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। मध्यम और लघु उद्योग (MSME) जो पहले से ही बंद होने के कगार पर हैं और ऊर्जा के लिए LPG पर निर्भर हैं, उनके लिए अपना व्यापार लाभ में चला पाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

गुलाटी ने कहा कि जब कमर्शियल ईंधन महंगा होता है, तो इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव हर उस सेवा पर पड़ता है जहां इसका इस्तेमाल होता है, जिससे अंततः आम उपभोक्ता की जेब पर ही बोझ बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के ठीक बाद इस तरह की वृद्धि जनता के लिए एक बड़े वित्तीय झटके के समान है। 

गुलाटी ने कहा कि मिडिल ईस्ट के युद्ध जैसे बाहरी कारणों के बावजूद, सब्सिडी या टैक्स कटौती के जरिए राहत देना अक्सर सरकार के नीतिगत फैसलों के दायरे में आता है, जिसे सरकार का लागू करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार में यदि देश के आम आदमी और छोटे एवं मझले उद्योग-धंधे चलाने वाली औद्योगिक इकाईयों के प्रति तनिक भी संवेदना है तो उसे यह बेतहाशा मूल्य वृद्धि अविलम्ब वापस लेनी चाहिए।

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