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सत्ता से सवाल, दमन और ऐतिहासिक समानताएं : अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, आज देश की राजधानी दिल्ली में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और चुनावी निष्पक्षता के लिए उठने वाली आवाज़ों को प्रशासनिक शक्ति के बल पर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।  कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के युवा नेता सौरभ दास , आशुतोष रांका , अभिजीत दिपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा जैसे कार्यकर्ताओं को सिर्फ इसलिए पुलिसिया दमन और हिरासत का शिकार होना पड़ रहा है , क्योंकि वे सरकार से तीखे सवाल पूछ रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। नेताओं की इस कथित प्रताड़ना और गिरफ्तारी के खिलाफ जब युवाओं ने 'लहरा दो तिरंगा' मार्च (Tricolour March) का शांतिपूर्ण आह्वान किया, तो नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) द्वारा दिल्ली के कनॉट प्लेस और सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर छावनी में बदल दिया गया।  इसके बावजूद, सैकड़ों छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने हाथ में तिरंगा लेकर इस ऐतिहासिक मार्च को आगे बढ़ाया। मंडी हाउस से लेकर कनॉट प्लेस तक युवाओं की आवाज़ गूंजी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भारतीय न...
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