मित्रों, आज जैसे हालात हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में माना है कि 'मध्य पूर्व में इज़रायल-अमरीका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में भारत के समक्ष भी 'अप्रत्याशित चुनौतियां' हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान संकट पर आज सोमवार देश की संसद को संबोधित करते हुए कोरोना काल का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को तैयार रहने की ज़रूरत है। मित्रों, मेरा मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए हमें अपने सभी वैचारिक मतभेद भुलाकर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते आए संकट से निपटने, उससे जूझने के लिए अपनी सरकार का मजबूती से सहयोग करना चाहिए और जिस तरह से हमने कोरोना से जंग लड़ी थी, उसी तरह से इस संकट से भी जीतना है। मेरा मानना है कि केन्द्र सरकार को रसोई गैस सिलेंडर की कमी को दूर करने के लिए कोयला एवं लकड़ी जैसे वैकल्पिक इंधन का प्रयोग करने की इज़ाजत दे देनी चाहिए। साथ ही सड़कों पर अनावश्यक दौड़ रही प्राइवेट कारों (वाहनों) के चलन पर रोक लगाकर, इलैक्ट्रिक वाहनों, बसों सहित रेलगाड़ियों और मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इस्तेमाल करने उसे प्रोत्साहन देने का सख्त आदेश जारी कर...
भारत में न तो इस्लाम और न ही उसको मानने वालों पर कोई खतरा है, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथी मुसलमान जरूर भीतर ही भीतर भारत के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं!मैंने महसूस किया है कि भारत में कुछ मुसलमान जो कि मज़हबी कट्टरता का लबादा ओढ़े हैं सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे, उनकी सहानुभुति भारत के साथ कम इस्लामिक राष्ट्रों के साथ कुछ ज़्यादा है।.... कहते हैं फिलिस्तीन ज़िन्दाबाद... ठीक है भाई, फिलिस्तिन जिन्दाबाद कोई बात नहीं.... खूब बोलो खूब हमदर्दी जताओ!लेकिन उन्हें भारत माता की जय बोलने और वन्दे मातरम् बोलने से चिड़ मचती है... छाती ठोक कर कहते हैं कि नहीं बोलेंगे.... और यदि आप उन्हें कहें कि भारत माता की जय नहीं बोलोगे तो किसी इस्लामिक देश की नागरिकता ले लो और वहां चले जाओ। सीना ठोककर कहते हैं कि वहां भी नहीं जाएंगे! मतलब साफ है कि वो भीतर ही भीतर भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समाज के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं! उनके मंसूबे कुछ और ही बयान कर रहे हैं। इस तरह के लोग अपने मादर-ए-वतन से प्रेम करने वाले अमनपसंद मुसलमानों के भी कट्टर दुश्मन हैं।जो मुसलमान अपने मादर-ए-वतन के प्रति प्रेम नहीं र...