मित्रों, दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर, जो कभी ग्रहों की गति और समय के चक्र को मापने के लिए वैज्ञानिक सटीकता का प्रतीक बना था, आज देश की राजनीतिक दिशा और दशा का थर्मामीटर बन चुका है। हाल ही में देशभर से एकत्रित हुए हजारों युवाओं, विभिन्न विचारधाराओं के विचारकों और जननेताओं के महासंगम ने एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। इस अभूतपूर्व एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग भले ही अपनी मर्जी से नीतियां चला रहे हों, लेकिन समय और जनता के इरादों का चक्र अब मोदी सरकार के पक्ष में नहीं घूम रहा है। 1. वैज्ञानिक प्रतीक और राजनीतिक यथार्थ जंतर-मंतर की वेधशाला (Observatory) हमें सिखाती है कि प्रकृति में कुछ भी स्थायी नहीं है—समय बदलता है और ग्रहों की चाल भी बदलती है। आज इस ऐतिहासिक स्थल से उठी आवाज इस बात का साक्ष्य है कि राजनीतिक बदलाव की बयार चल पड़ी है। जब देश की युवा शक्ति सड़कों पर उतरती है, तो वह केवल विरोध नहीं करती, बल्कि सत्ता के अहंकार को चुनौती देकर समय का रुख बदलने का माद्दा रखती है। 2. तानाशाही रवैये और मनमानियों के खिलाफ एकजुटता लोकतंत्र संवा...
धर्म का व्यापार और राजनीति का घालमेल; समाज और देश के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती: अभिमन्यु गुलाटी मित्रों, आज हमारे देश में धर्म का व्यापार और उसमें राजनीति का तड़का जोर-शोर से चल रहा है। यह गठजोड़ न सिर्फ फल-फूल रहा है, बल्कि समाज की जड़ों को भी कमजोर कर रहा है। वर्तमान दौर में धर्म, राजनीति और नौकरशाही का एक ऐसा ताना-बाना बन चुका है, जिसने आम जनता के विश्वास और देश के संसाधनों को गहरे संकट में डाल दिया है। धर्म के नाम पर मायाजाल: आज कोई भी धार्मिक संत, महात्मा, कथावाचक और धर्मगुरु इस विडंबना से अछूता नहीं है। जो बाबा और गुरु अपने सत्संगों और कथाओं में आम जनमानस को मोह-माया का त्याग करने का संदेश देते हैं, वे खुद इस मायाजाल में बुरी तरह फंसे हुए हैं। विरोधाभास: त्याग का उपदेश देने वाले इन गुरुओं की अपनी बड़ी महत्वाकांक्षाएं हैं सादगी का पाठ पढ़ाने वाले ये आधुनिक संत आज हजारों करोड़ की संपदा के मालिक बने बैठे हैं। राजनीति और समाज सेवा का गिरता स्तर: रही बात राजनीतिज्ञों की, तो उनकी स्थिति और भी चिंताजनक है। समाज सेवा के पवित्र नाम पर राजनीति में कदम रखने वाले लोग आज दे...