मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते आए संकट से निपटने के लिए अपनी सरकार का मजबूती से सहयोग करें। अभिमन्यु गुलाटी
मित्रों, आज जैसे हालात हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में माना है कि 'मध्य पूर्व में इज़रायल-अमरीका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में भारत के समक्ष भी 'अप्रत्याशित चुनौतियां' हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान संकट पर आज सोमवार देश की संसद को संबोधित करते हुए कोरोना काल का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को तैयार रहने की ज़रूरत है।
मित्रों, मेरा मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए हमें अपने सभी वैचारिक मतभेद भुलाकर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते आए संकट से निपटने, उससे जूझने के लिए अपनी सरकार का मजबूती से सहयोग करना चाहिए और जिस तरह से हमने कोरोना से जंग लड़ी थी, उसी तरह से इस संकट से भी जीतना है।
मेरा मानना है कि केन्द्र सरकार को रसोई गैस सिलेंडर की कमी को दूर करने के लिए कोयला एवं लकड़ी जैसे वैकल्पिक इंधन का प्रयोग करने की इज़ाजत दे देनी चाहिए।
साथ ही सड़कों पर अनावश्यक दौड़ रही प्राइवेट कारों (वाहनों) के चलन पर रोक लगाकर, इलैक्ट्रिक वाहनों, बसों सहित रेलगाड़ियों और मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इस्तेमाल करने उसे प्रोत्साहन देने का सख्त आदेश जारी कर देना चाहिए।
इतना ही नहीं, वर्क फ्रोम होम सरकारी महकमों सहित बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों /अधिकारियों के लिए तुरन्त प्रभाव से लागू कर देना चाहिए। इस सबसे पेट्रोल-डीज़ल सहित गैस की बड़ी भारी बचत होगी।
मध्य-पूर्व (Middle East) के मौजूदा हालात निश्चित रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।
इस संकट से निपटने के लिए उपरोक्त सुझाव, व्यावहारिक और दूरगामी प्रभाव वाले हो सकते हैं।
राष्ट्रीय संकट के समय वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में साथ खड़ा होना ज़रूरी है, जैसा हमने कोरोना काल में देखा था।
रसोई गैस की संभावित कमी को देखते हुए वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान देना एक तार्किक कदम है, हालांकि पर्यावरण मानकों को ध्यान में रखते हुए हम आधुनिक 'क्लीन कुकिंग' विकल्पों (जैसे सोलर कुकर या इंडक्शन) को भी प्रयोग कर सकते हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट और EV: निजी वाहनों की जगह मेट्रो, बस और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता देना न केवल ईंधन बचाएगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता को भी कम करेगा।
वर्क फ्रॉम होम (WFH): यह पेट्रोल-डीजल की खपत तुरंत कम करने का सबसे प्रभावी और परीक्षित तरीका है। इसे लागू करने से सड़कों पर भीड़ कम होगी और भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
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