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प्रधानमंत्री मोदी संकट को 'राष्ट्रहित' का चोला पहनाकर जनता के सामने पेश करने के माहिर खिलाड़ी हैं: अभिमन्यु गुलाटी

चुनावों से पूर्व सब चंगा सी....और चुनावों के बाद....?

पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खाड़ी युद्ध के हालातों के चलते एक साल सोना नहीं खरीदने एवं खाने के तेल सहित ईंधन की बचत करने की भावानात्मक अपील पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा चुनावों के दौरान 'लोकलुभावन' माहौल और 'सब चंगा सी' वाली छवि बनाई गई, लेकिन परिणाम आते ही उनके कड़वे फैसलों का दौर शुरू हो गया है।

उन्होंने कहा कि काश सरकार और बीजेपी संगठन अपने अनाप-शनाप के खर्चों सहित चुनावों में जीत हासिल करने, विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपया खर्च करने से खुद को रोक लेती तो शायद बेहतर होता। 

गुलाटी ने कहा कि यह कितना हास्यास्पद है कि पांच राज्यों के चुनाव और उसमें खर्च किए गए बेहिसाब धन सहित देश के तमाम संसाधनों की बर्बादी के बाद साहेब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को याद आया कि देश में तेल सहित विदेशी मुद्रा भंडार की कमी हो रही है।

और वे मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते उपजे संकट से अवगत करवाने सहित देशवासियों से भावनात्मक अपील करने एकबार फिर कल तेलंगाना में टेलीविज़न के पर्दे पर प्रस्तुत हो गए।

गुलाटी ने कहा कि "प्रधानमंत्री का यह संदेश इस बात का सूचक है कि अब देश में पेट्रोल-डीज़ल सहित तमाम पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में बेतहाशा मूल्य वृद्धि होने जा रही है"।

उन्होंने कहा कि इस मूल्य वृद्धि से देश के आम आदमी की कमर एकबार फिर टूटना निश्चित है। और इसका सीधा असर अपना छोटे-मोटा काम-धंधा कर रहे उद्यमियों सहित मज़दूरों पर पड़ेगा।

और सरकार के इस कदम का सीधा लाभ देश के बड़े औद्योगिक घरानों सहित तेल कंपनियों को ही होगा जिनसे चुनावों को मैनेज करने के लिए बीजेपी ने अकूट पैसा लिया है और उसे पानी की तरह से बहाया है।

गुलाटी ने कहा कि अपने बेहिसाब चुनावी खर्च, सत्ता के प्रबंधन और फिर उसकी भरपाई जनता की जेब से करना—लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती की ओर इशारा करते हैं। 

उन्होंने कहा कि जब-जब तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो उसका सीधा असर रसोई से लेकर परिवहन और हर उपभोक्ता वस्तु पर पड़ता है, जबकि कॉर्पोरेट घरानों और कंपनियों के मुनाफे अक्सर सुरक्षित रहते हैं।

गुलाटी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि किसी भी संकट को 'राष्ट्रहित' का चोला पहनाकर, जनता के सामने भावनात्मक रूप से पेश करने के फन में वे माहिर खिलाड़ी हैं।

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