मित्रों, दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर, जो कभी ग्रहों की गति और समय के चक्र को मापने के लिए वैज्ञानिक सटीकता का प्रतीक बना था, आज देश की राजनीतिक दिशा और दशा का थर्मामीटर बन चुका है। हाल ही में देशभर से एकत्रित हुए हजारों युवाओं, विभिन्न विचारधाराओं के विचारकों और जननेताओं के महासंगम ने एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। इस अभूतपूर्व एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग भले ही अपनी मर्जी से नीतियां चला रहे हों, लेकिन समय और जनता के इरादों का चक्र अब मोदी सरकार के पक्ष में नहीं घूम रहा है। 1. वैज्ञानिक प्रतीक और राजनीतिक यथार्थ जंतर-मंतर की वेधशाला (Observatory) हमें सिखाती है कि प्रकृति में कुछ भी स्थायी नहीं है—समय बदलता है और ग्रहों की चाल भी बदलती है। आज इस ऐतिहासिक स्थल से उठी आवाज इस बात का साक्ष्य है कि राजनीतिक बदलाव की बयार चल पड़ी है। जब देश की युवा शक्ति सड़कों पर उतरती है, तो वह केवल विरोध नहीं करती, बल्कि सत्ता के अहंकार को चुनौती देकर समय का रुख बदलने का माद्दा रखती है। 2. तानाशाही रवैये और मनमानियों के खिलाफ एकजुटता लोकतंत्र संवा...