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कोरोना को लेकर जिस तरह की लापरवाही देखी जा रही है वह गंभीर संकट को आमंत्रित करने वाली है: अभिमन्यु गुलाटी

अब कोई नहीं आएगा बचाने...अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी पड़ेगी। इसलिए हो जाएं सावधान। मित्रों,  महाशिवरात्रि पर गत दिवस हरिद्वार में कुम्भ का शुभारम्भ शाही स्नान के साथ शुरू हो गया है। इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों की भीड़ हरिद्वार में उमड़ेगी।  कुम्भ मेला भारत के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है लेकिन ये आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब देश में कोरोना की दूसरी लहर ने जोरदार दस्तक दे दी है। गत् दिवस 22 हजार से भी ज़्यादा नए मामले आये हैं जबकि स्वस्थ होकर अस्पतालों से लौटने वालों की संख्या काफ़ी कम है।  केरल, गुजरात और महाराष्ट्र से भी चिन्ताजनक खबरें बराबर आ रही हैं। पूरे देश से लोग कुम्भ में आयेंगे। वहीं असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के कारण कोरोना से बचाव के प्रति वैसे भी लोगों सहित नेताओं और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में लापरवाही देखी जा रही है।  'मास्क' और शारीरिक दूरी की सलाह की  पूरी तरह उपेक्षा की जा रही है।  ...

"अटल रक्त अभियान" के पूरे हुए 26 वर्ष: अभिमन्यु गुलाटी

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री, युग पुरुष, भारत  रत्न, श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जन्म जयन्ती 25 दिसम्बर के अवसर पर, पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के तत्वावधान में "अटल रक्त अभियान" 2020 का सफल आयोजन, देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के शाहदरा क्षेत्र स्थित डी०डी०ए० फलैट्स, मानसरोवर पार्क में किया गया।  COVID-19 कोरोना काल के बावजूद युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ लाइन में लगकर, घंटों अपनी बारी का इन्तज़ार करते हुए रक्तदान किया। इस सफल कार्यक्रम का आयोजन पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के संस्थापक प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने किया। प्रेस सहित सोशल मीडिया एवं अपने ब्लॉग पर जारी एक बयान में  उन्होंने कहा कि वे विगत् 26 वर्षों से 'रक्तदान 'के क्षेत्र में सक्रिय हैं। स्वयं भी रक्तदान का शतक बना, 102 बार रक्तदान कर चुके गुलाटी ने कहा कि कोविड-19 महामारी, कोरोना काल में आज देश की राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम सरकारी एवं निजी अस्पताल एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के ब्ल्ड बैंक स्वयं ख़ून की कमी का शिकार हो गए हैं।  उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ख़ू...

"आज का बड़ा सवाल! क्या हम सच में आजाद हैं ?"

मित्रों, हर साल की तरह इसबार भी 15 अगस्त यानी "स्वतंत्रता दिवस" आ रहा है। 15 अगस्त यानीकि हमारी आजादी का दिन। इस दिन हमने अंग्रेज़ी हुकूमत की गुलामी से मुक्ति पा ली थी। 15 अगस्त सन् 1947 को अंग्रेजों से आजादी पाने के बाद से हर साल इस दिन को हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। स्कूल, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों तथा अन्य सभी जगहों पर आजादी का जोरदार जश्न मनाया जाता है। इस बार भी हम सब अपनी आजादी का 74.वां जश्न मनाने के लिए तैयार हैं।    लेकिन उसके पहले एक सवाल बार-बार मेरे मन में उठ रहा है कि क्या हम सच में आजाद हैं? क्या हम स्वतंत्रता का सही अर्थ समझ पाए हैं? ये तमाम प्रश्न न केवल हमारी आजादी पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं, बल्कि समाज के बौद्धिक वर्ग व आम जनता को आजादी के सही मायने खोजने के लिए भी प्रेरित करते हैं।     सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में ही सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।    दुष्यंत की ये पंक्तियां आजादी के 73,वर...

लॉकडाउन में रियायत या ढील देश को बड़े संकट की और धकेलने जैसा होगा: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, मैं जनता कर्फ्यू के दिन विगत् 21 मार्च से ही प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित देशव्यापी लॉकडाउन का समर्थन करता आ रहा था।  आप और हम भी बार-बार इस विषय पर चर्चा करते थे कि अब Stringent कठोर लॉकडाउन की जरूरत है। टेलीविज़न के पर्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की चिन्ता "जान है तो जहान है" पर उनकी भाव भंगिमा  देखकर भी लगता था कि स्थिति बहुत नाजुक है। और अब कठोर Stringent लॉकडाउन की सख्त जरूरत है।  लक्ष्मण रेखा को भी पार नहीं करन है।  लेकिन अचानक से ऐसा क्या हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी कहने लगे की "जान भी और जहान भी" ?  मित्रों, उसके बाद सरकार ने मरी हुई अर्थव्यवस्था में प्राण फूंकने, उसे जीवित करने के  उद्देश्य से  अपने राजस्व की चिन्ता करते हुए और अपने बड़े उद्योगपति मित्रों के दवाब में आकर देश की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस रूपी महादानव के मुख में झोंकने के लिए लॉकडाउन को विगत् 14 अप्रैल के बाद से निरन्तर Dilute कमजोर करना शुरू कर दिया।  मित्रों,  जिस तरह से रोज़ कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या देश की राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश ...

Blood Donation

25 साल बेमिसाल! Blood donation De. 25th 2019

बाजारू संस्कृती को बढ़ावा देने वाले पाश्चात्य सभ्यता पर आधारित वेलेंटाइन्स-डे का विरोध किया जाना चाहिए। - अभिमन्यु गुलाटी

नई दिल्ली: पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के संस्थापक प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने आज वसंतोत्सव (वसंत पंचमी) की पूर्व संध्या पर अपने कार्यालय पर आयोजित एक बैठक के बाद सोशल मीडिया सहित प्रेस को जारी किए गए अपने बयान में कहा कि हमें पाश्चात्य/पश्विमी सभ्यता पर आधारित और बाज़ारू संस्कृति को बढ़ावा देने वाले त्योहार वेलेंटाइन्स-डे का विरोध करना चाहिए और फूलों के त्योहार वसंतोत्सव, वसंत पंचमी को पूरे धूम-धाम से मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वेलेंटाइन्स-डे जैसे पाश्चात्य/पश्चिमी सभ्यता पर आधारित त्योहार भारतीय मूल्यों और संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने की विदेशी कंपनीयों की साजिश है।  गुलाटी ने कहा कि हीर-रांझा, सोहनी-महिवाल के देश में प्रेम के इज़हार के लिए हमें किसी विदेशी वेलेंटाइन की कोई जरुरत नहीं है।  गुलाटी ने युवाओं एवं इस पाश्चात्य सभ्यता पर आधारित त्योहार वेलेंटाइन-डे को बढ़ावा देने में लगे मीडिया से प्रश्न करते हुए कहा कि मैं पूछना चाहता हूँ कि Why Should We Celebrate Valentines Day, Why Not Vasant Utsav ?

क्या हम सच में आजाद हैं ?- अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, हर साल की तरह इसबार भी 15 अगस्त यानी "स्वतंत्रता दिवस" आ रहा है। 15 अगस्त यानीकि हमारी आजादी का दिन। इस दिन हमने अंग्रेज हकूमत की गुलामी से मुक्ति पा ली थी। 15 अगस्त सन् 1947 को ...