सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

"अटल रक्त अभियान" के पूरे हुए 26 वर्ष: अभिमन्यु गुलाटी


नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री, युग पुरुष, भारत रत्न, श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जन्म जयन्ती 25 दिसम्बर के अवसर पर, पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के तत्वावधान में "अटल रक्त अभियान" 2020 का सफल आयोजन, देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के शाहदरा क्षेत्र स्थित डी०डी०ए० फलैट्स, मानसरोवर पार्क में किया गया। 
COVID-19 कोरोना काल के बावजूद युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ लाइन में लगकर, घंटों अपनी बारी का इन्तज़ार करते हुए रक्तदान किया।
इस सफल कार्यक्रम का आयोजन पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के संस्थापक प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने किया। प्रेस सहित सोशल मीडिया एवं अपने ब्लॉग पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि वे विगत् 26 वर्षों से 'रक्तदान 'के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
स्वयं भी रक्तदान का शतक बना, 102 बार रक्तदान कर चुके गुलाटी ने कहा कि कोविड-19 महामारी, कोरोना काल में आज देश की राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम सरकारी एवं निजी अस्पताल एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के ब्ल्ड बैंक स्वयं ख़ून की कमी का शिकार हो गए हैं। 
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ख़ून की कमी के संकट को भांपते हुए और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अन्य गंभीर रोगों एवं सड़क हादसों के शिकार लोगों की चिन्ता करते हुए उन्होंने कोरोना काल में रक्तदान शिविर के आयोजन का निर्णय अपने सहयोगियों से चर्चा करने के उपरान्त लिया।
गुलाटी ने कहा कि शिविर के आयोजन में उन्हें अपने सहयोगियों एवं गुरु तेगबहादुर अस्पताल GTB के ब्लड बैंक के डाक्टरों, तकनीशियों सहित समाज के अन्य लोगों एवं रक्तदाताओं का पूरा साथ मिला।
उन्होंने ने कहा कि दिसम्बर, 25 के इस रक्तदान शिविर में रक्तदान हेतू 200 से भी अधिक लोगों ने अपना पंजीकरण करवाया था लेकिन किन्हीं कारणों के चलते सिर्फ 150 लोग ही अपना रक्तदान कर सके जोकि आज की कोरोना महामारी के इस दौर की एक बड़ी उपलब्धी है।
"अटल रक्त अभियान" 2020 की सफ़लता का सारा श्रेय गुलाटी ने रक्तदाताओं एवं अपने सहयोगियों को देते हुए कहा कि उनके बिना ये संभव नहीं था। आज के इस कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री आलोक कुमार (एडवोकेट) मुख्य रूप से उपस्थित थे।
उन्होंने कार्यक्रम के संयोजक अभिमन्यु गुलाटी को शाल ओढ़ाकर समाज में उनका मान-सम्मान बढ़ाते हुए उनकी हौसला अफजाई की।
विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि उन्होंने अपने इतने लम्बे सामाजिक जीवन में ऐसा कोई भी रक्तदान का कार्यक्रम नहीं देखा जोकि निरन्तर पिछले 26 वर्षों से जारी हो।
आज के इस कार्यक्रम में रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार के विशेष मुख्य सचिव सुनील कुमार गुलाटी IAS, रोहतास नगर क्षेत्र के स्थानीय विधायक जितेन्द्र महाजन, पूर्वी दिल्ली नगर निगम स्थायी समिति के सदस्य, स्थानीय पार्षद प्रवेश शर्मा ,पार्षदा सुमनलता नागर, पार्षद अजय शर्मा, पूर्व उपमहापौर दिव्य जायसवाल, ईस्ट दिल्ली मेडिकल सेन्टर के निदेशक डॉ० अजय बेदी, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ० अरविंद सिंह, कोरोना काल में निडर होकर काम करने वाले डॉ० प्रमोद शर्मा, पूर्व पार्षदा उमा गंगवार, पूर्व पार्षद अनिल वशिष्ठ, ईश्वर सिंह बागड़ी, अनिल गौतम सहित भाजप जिला नवीन शाहदरा के पूर्व जिलाध्यक्ष, अनिल गुप्ता, कैलाश जैन, स्वदेशी जागरण मंच के सुशील पांचाल, मनोज गुप्ता, हिन्दू जागरण मंच के रवि कालिया, रविराज द्विवेदी और पंकज गौड़ सहित कांग्रेस के युवा नेता मुदित अग्रवाल एवं विभिन्न राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठनों के लोगों सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
गुलाटी ने बताया कि उन्होंने इसबार कोरोना काल में धन का सदुपयोग करने के उद्देश्य से कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों को "डिज़ीटल स्मृति चिन्ह" भेंट किए हैं जोकि अपने आप में एक अनूठी पहल है।



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे, TMC नेता ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों , पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी और ममता बनर्जी की पार्टी TMC का सत्ता से बेदखल होना,  देश की बाकी अन्य सभी पार्टियों के लिए सबक है कि देश का बहुसंख्यक हिन्दू समाज अंधा नहीं है, यदि आप तुष्टीकरण की राजनीति करोगे तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसका फ़ायदा उठायेगी ही उठायेगी। और उठाए भी क्यूं न ? कल बंगाल के मतदाताओं ने देश की तमाम बाकी राजनीतिक पार्टियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि यदि जीतना है तो निष्पक्षता का ड्रामा करके एक पक्ष के प्रति ज़्यादा वफ़ादार होने से काम नहीं चलेगा, आपको बाकायदा पक्षपाती होकर देश के 80% बहुसंख्यक हिन्दू समाज के साथ खड़े होना ही पड़ेगा।  फिर यही 80% हिन्दू समाज, 20% का भी खयाल रखेगा, उन्हें किसी चीज़ की तकलीफ़ नहीं होने देगा।  लेकिन आप 20% को ही सब कुछ मानकर राजनीति करेंगे तो ये 80% आपको तकलीफ़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाएगा। कल के बंगाल चुनाव के नतीजे तो शायद इसी और इशारा करते हैं। "डेमोक्रेसी तो डेमोग्राफी से ही चलती है"! "बंगाल में केवल सत्ता परिवर्तन, भाजपा की प्रचंड जीत या TMC की हार की दृष्टि से न देखकर यह समझना होगा कि ...

कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा मूल्य वृद्धि पर गुलाटी ने केन्द्र की मोदी सरकार को असंवेदनशील करार दिया।

नई दिल्ली:  पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने आज केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा वृद्धि की तीखी और कटु आलोचना की है। आज प्रेस सहित अपने ब्लाग पर जारी बयान में गुलाटी ने कहा कि फरवरी 2026 में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹ 1,740.50 हुआ करती थी। जो आज बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव निपट जाने के बाद 1 मई 2026 को बढ़कर ₹ 3,071.50 हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गैस के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा वृद्धि जोकि 76% है। इस बात का संकेत है कि उसकी इन कंपनियों के साथ सांठ-गांठ है और उसने तेल और गैस कंपनियों को आम आदमी को लूटने, उनकी जेब पर डाका डालने की की खुली छूट दे दी है।  गुलाटी ने कहा कि पहले से ही ज़बरदस्त महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी की सरकार के इस कदम से कमर टूटना निश्चित है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने निश्चित रूप से वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है, लेकिन घरेलू स्तर पर इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर छोटे व्यापारि...

"We are the party with a difference" की बात करने वालों का "चाल-चरित्र और चेहरा" 2014 के बाद सबके सामने उजागर हो गया: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, एक ज़माना ऐसा भी था जब भाजपा वाले यह कहते नहीं थकते थे कि "We are the party with a difference"! जब वर्ष 2014 के मई माह में, पूर्ण बहुमत की सरकार इनके हाथ लगी, उसके बाद से इनका भी "चाल-चरित्र और चेहरा" सबके सामने उजागर हो गया।  इनके चेहरे से नकाब उतर गया। अब सवाल उठता है कि हम करें भी तो क्या करें ? शायद सत्ता का चरित्र ही कुछ ऐसा है! "Party with a difference" का नारा वाकई भाजपा की पहचान रहा है, लेकिन 2014 के बाद के सफर ने कई सवाल खड़े किए हैं। 1- आदर्श बनाम यथार्थ:  विपक्ष में रहते हुए सिद्धांत और नैतिकता की बातें करना आसान होता है, लेकिन जब पूर्ण बहुमत की सत्ता हाथ में आती है, तो 'रियल पॉलिटिक्स' (Real Politics) यानी व्यावहारिक राजनीति हावी हो जाती है। 2- सत्ता का चरित्र:  शायद सत्ता का स्वभाव ही ऐसा है कि वह अंततः चेहरों पर से नकाब हटा देती है।  जब संसाधनों और नियंत्रण की ताकत मिलती है, तो पुरानी पार्टियों और नई पार्टियों के बीच का अंतर धुंधला होने लगता है। 3- जनता की दुविधा:  "अब करें भी तो क्या करें?" —यह आज के ...