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आखिर हम कब तक यूँ ही अपने जाबांज सैनिकों के शवों को तिरंगे में लपेट उनके परिवारजनों को सोंप मातम मनाते रहेंगे

न दिल्ली : पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F.) के प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने आज जम्मू-कश्मीर घाटी के उरी में पाक-परस्त आतंकवादियों द्वारा सेना मुख्यालय को निशाना बनाए जाने जिसमें हमारे 20 जाबांज सैनिक शहीद हुए हैं कि उक्त घटना पर दुख जताते हुए अपना जबरदस्त रोष प्रकट किया है l सोशल मीडिया सहित प्रेस को जारी अपने बयान में श्री गुलाटी ने कहा कि देश की जनता केन्द्र की सत्ता में काबिज नरेंद्र मोदी सरकार से यह जानना चाहती है कि आखिर हम कब तक यूँ ही अपने जाबांज सैनिकों के शवों को तिरंगे में लपेट उनके परिवारजनों को सोंप मातम मनाते रहेंगे आखिर कब तक l उन्होंने कहा कि आज देश में इस बात की जबरदस्त चर्चा  है कि वर्ष 2014 में आतंकवाद के सामूल नाश का दंभ भर केन्द्र की सत्ता पर काबिज हुई भारतीय जनता पार्टी जब-जब केन्द्र की सत्ता पर काबिज होती है तब-तब आतंकवादी हमले और घुसपैठ तेज हो जाते हैं l गुलाटी ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब सेना के बंधे हाथ खोल देने चाहिएं और दुश्मन देश पाकिस्तान को उसकी ही भाषा में जवाब दिया जाए l उन्होंने ने कहा कि वे और उनका संगठन विगत् कई वर्षों से पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान को आतंकवादी राष्ट्र घोषित करने की मांग अमरीका सहित अन्य सार्क देशों से करते आ रहे हैं l गुलाटी ने कहा कि अब भी यदि समय रहते केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कुछ नहीं किया तो देश की जनता भारतीय जनता पार्टी को कभी भी माफ नही करेगी l उन्होंने कहा कि  अपना 56" का सीना दिखाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास यही सही वक्त है l

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पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे, TMC नेता ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों , पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी और ममता बनर्जी की पार्टी TMC का सत्ता से बेदखल होना,  देश की बाकी अन्य सभी पार्टियों के लिए सबक है कि देश का बहुसंख्यक हिन्दू समाज अंधा नहीं है, यदि आप तुष्टीकरण की राजनीति करोगे तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसका फ़ायदा उठायेगी ही उठायेगी। और उठाए भी क्यूं न ? कल बंगाल के मतदाताओं ने देश की तमाम बाकी राजनीतिक पार्टियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि यदि जीतना है तो निष्पक्षता का ड्रामा करके एक पक्ष के प्रति ज़्यादा वफ़ादार होने से काम नहीं चलेगा, आपको बाकायदा पक्षपाती होकर देश के 80% बहुसंख्यक हिन्दू समाज के साथ खड़े होना ही पड़ेगा।  फिर यही 80% हिन्दू समाज, 20% का भी खयाल रखेगा, उन्हें किसी चीज़ की तकलीफ़ नहीं होने देगा।  लेकिन आप 20% को ही सब कुछ मानकर राजनीति करेंगे तो ये 80% आपको तकलीफ़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाएगा। कल के बंगाल चुनाव के नतीजे तो शायद इसी और इशारा करते हैं। "डेमोक्रेसी तो डेमोग्राफी से ही चलती है"! "बंगाल में केवल सत्ता परिवर्तन, भाजपा की प्रचंड जीत या TMC की हार की दृष्टि से न देखकर यह समझना होगा कि ...

कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा मूल्य वृद्धि पर गुलाटी ने केन्द्र की मोदी सरकार को असंवेदनशील करार दिया।

नई दिल्ली:  पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने आज केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा वृद्धि की तीखी और कटु आलोचना की है। आज प्रेस सहित अपने ब्लाग पर जारी बयान में गुलाटी ने कहा कि फरवरी 2026 में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹ 1,740.50 हुआ करती थी। जो आज बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव निपट जाने के बाद 1 मई 2026 को बढ़कर ₹ 3,071.50 हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गैस के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा वृद्धि जोकि 76% है। इस बात का संकेत है कि उसकी इन कंपनियों के साथ सांठ-गांठ है और उसने तेल और गैस कंपनियों को आम आदमी को लूटने, उनकी जेब पर डाका डालने की की खुली छूट दे दी है।  गुलाटी ने कहा कि पहले से ही ज़बरदस्त महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी की सरकार के इस कदम से कमर टूटना निश्चित है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने निश्चित रूप से वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है, लेकिन घरेलू स्तर पर इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर छोटे व्यापारि...

"We are the party with a difference" की बात करने वालों का "चाल-चरित्र और चेहरा" 2014 के बाद सबके सामने उजागर हो गया: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, एक ज़माना ऐसा भी था जब भाजपा वाले यह कहते नहीं थकते थे कि "We are the party with a difference"! जब वर्ष 2014 के मई माह में, पूर्ण बहुमत की सरकार इनके हाथ लगी, उसके बाद से इनका भी "चाल-चरित्र और चेहरा" सबके सामने उजागर हो गया।  इनके चेहरे से नकाब उतर गया। अब सवाल उठता है कि हम करें भी तो क्या करें ? शायद सत्ता का चरित्र ही कुछ ऐसा है! "Party with a difference" का नारा वाकई भाजपा की पहचान रहा है, लेकिन 2014 के बाद के सफर ने कई सवाल खड़े किए हैं। 1- आदर्श बनाम यथार्थ:  विपक्ष में रहते हुए सिद्धांत और नैतिकता की बातें करना आसान होता है, लेकिन जब पूर्ण बहुमत की सत्ता हाथ में आती है, तो 'रियल पॉलिटिक्स' (Real Politics) यानी व्यावहारिक राजनीति हावी हो जाती है। 2- सत्ता का चरित्र:  शायद सत्ता का स्वभाव ही ऐसा है कि वह अंततः चेहरों पर से नकाब हटा देती है।  जब संसाधनों और नियंत्रण की ताकत मिलती है, तो पुरानी पार्टियों और नई पार्टियों के बीच का अंतर धुंधला होने लगता है। 3- जनता की दुविधा:  "अब करें भी तो क्या करें?" —यह आज के ...