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" खून बेचने के लिए नहीं होता है"। केन्द्र सरकार के बल्ड बैंकों सहित अस्पतालों के लिए आए नये दिशा-निर्देशों का गुलाटी ने स्वागत किया।




नई दिल्लीः पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के अध्यक्ष और देश की राजधानी दिल्ली में, रक्तदान के क्षेत्र में विगत् 30 वर्षों से सक्रिय, स्वयं 110 बार रक्तदान कर चुके, "अटल रक्तदान अभियान" के संयोजक अभिमन्यु गुलाटी  ने केन्द्र सरकार के औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा निजी एवं कुछ सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट ब्लड बैंकों द्वारा ब्लड देने के बदले, मरीजों के परिवारजनों से मोटी रकम वसूलने के ऊपर लगाम कसने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए अपनी चिन्ता भी व्यक्त की है।

गुलाटी ने का कि केन्द्र सरकार के कल आए इस नए फैसले के बाद ब्लड बैंक या अस्पताल से खून लेने पर अब प्रोसेसिंग शुल्क के अलावा किसी भी तरह का कोई अन्य चार्ज नहीं लगेगा। जिसके चलते रक्त की जरूरत वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को कुछ राहत मिलेगी।

गुलाटी ने कहा कि केन्द्र सरकार के औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कल यह स्पष्ट निर्देश जारी किया है और कहा है कि " खून बेचने के लिए नहीं होता है"। 

उन्होंने कहा कि तमाम निजी अस्पताल एवं निजी बल्ड बैंक खून के बदले मरीजों के तीमारदारों से रक्तदान न करने की स्थिति में औसतन 2,000 रुपये से 6,000 रुपये प्रति यूनिट वसूल लेते थे। इसके अलावा ब्लड की कमी या दुर्लभ ब्लड ग्रुप के मामले में यह शुल्क 10,000 रुपये से अधिक भी हो जाता था।

गुलाटी ने कहा कि अब लोगों से केवल संपूर्ण रक्त या पैक्ड रेड ब्लड सेल्स के लिए ₹ 1,550 रुपये का शुल्क लिया जाएगा, और प्लाज्मा और प्लेटलेटस के लिए शुल्क ₹ 400 रुपये प्रति पैक प्रोसेसिंग शुल्क ही लिया जाएगा।

 उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला ऐसे रोगियों के अनुकूल है, खासकर से उन लोगों के लिए जो थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया जैसे रक्त विकारों के कारण नियमित रक्त संक्रमण से गुजरते हैं या सर्जरी से गुजर रहे हैं और उनके रिश्तेदारों या दोस्तों द्वारा रक्तदान करना हमेशा संभव नहीं होता।

उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के जनहित में आए उक्त फैसले का हम स्वागत करते है लेकिन सिक्के के हमेशा दो पहलू भी होते हैं। हमारी कुछ शंकाएं भी हैं।

गुलाटी ने कहा कि उन्हें शंका है कि केंन्द्र सरकार द्वारा जनहित में उठाए गए इस कदम के बाद कहीं लोगों में रक्तदान करने को लेकर उनके उत्साह में कमी ना आ जाए। 

उन्होंने कहा कि हमारे देश के अस्पतालों सहित ब्लड बैंकों में आज भी मांग और आपूर्ति के अनुपात में बहुत बड़ा अंतर है। लोग आज भी रक्तदान करने से डरते हैं या जान-बूझकर भी रक्तदान ना कर किसी सामाजिक/ राजनीतिक संस्था के नेता या कर्ताधर्ता के सिफारशी पत्र के आधार पर रक्त प्राप्त कर लेना चाहते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि यह ब्लड बैंक भी किसी पैसे के लेन-देन करने वाले राष्ट्रीयकृत बैंक जैसा एक बैंक है!

बल्ड बैंक से यदि हम खून लेते ही रहेंगे और वापस जमा नहीं करेंगे तो हमारे देश के अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरह से हमारे बल्ड बैंक भी कंगाल हो जाएंगे, हाथ उठा देंगे तब ऐसी कठिन परिस्थिति में अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए रक्त कहां से आएगा ?

गुलाटी ने कहा कि हमारे देश में अभी भी लोगों में स्वैच्छिक रक्तदान करने को लेकर जागरूकता का अभाव है। लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने की ज बहुत आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को भी चाहिए कि रक्तदान के क्षेत्र से जुड़े लोगों, सामाजिक संस्थाओं को हर संभव सरकारी सहायता एवं संसाधन मुहैया कराए ताकि उनका भी हौसला बना रहे एवं वे इस काम मे सक्रिय रहें।

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