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संदेश

जंतर-मंतर.....और युवा शक्ति की हुंकार

मित्रों, दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर, जो कभी ग्रहों की गति और समय के चक्र को मापने के लिए वैज्ञानिक सटीकता का प्रतीक बना था, आज देश की राजनीतिक दिशा और दशा का थर्मामीटर बन चुका है।  हाल ही में देशभर से एकत्रित हुए हजारों युवाओं, विभिन्न विचारधाराओं के विचारकों और जननेताओं के महासंगम ने एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है।  इस अभूतपूर्व एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग भले ही अपनी मर्जी से नीतियां चला रहे हों, लेकिन समय और जनता के इरादों का चक्र अब मोदी सरकार के पक्ष में नहीं घूम रहा है। 1. वैज्ञानिक प्रतीक और राजनीतिक यथार्थ जंतर-मंतर की वेधशाला (Observatory) हमें सिखाती है कि प्रकृति में कुछ भी स्थायी नहीं है—समय बदलता है और ग्रहों की चाल भी बदलती है।  आज इस ऐतिहासिक स्थल से उठी आवाज इस बात का साक्ष्य है कि राजनीतिक बदलाव की बयार चल पड़ी है। जब देश की युवा शक्ति सड़कों पर उतरती है, तो वह केवल विरोध नहीं करती, बल्कि सत्ता के अहंकार को चुनौती देकर समय का रुख बदलने का माद्दा रखती है। 2. तानाशाही रवैये और मनमानियों के खिलाफ एकजुटता लोकतंत्र संवा...
धर्म का व्यापार और राजनीति का घालमेल; समाज और देश के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती:  अभिमन्यु गुलाटी मित्रों, आज हमारे देश में धर्म का व्यापार और उसमें राजनीति का तड़का जोर-शोर से चल रहा है। यह गठजोड़ न सिर्फ फल-फूल रहा है, बल्कि समाज की जड़ों को भी कमजोर कर रहा है। वर्तमान दौर में धर्म, राजनीति और नौकरशाही का एक ऐसा ताना-बाना बन चुका है, जिसने आम जनता के विश्वास और देश के संसाधनों को गहरे संकट में डाल दिया है। धर्म के नाम पर मायाजाल: आज कोई भी धार्मिक संत, महात्मा, कथावाचक और धर्मगुरु इस विडंबना से अछूता नहीं है। जो बाबा और गुरु अपने सत्संगों और कथाओं में आम जनमानस को मोह-माया का त्याग करने का संदेश देते हैं, वे खुद इस मायाजाल में बुरी तरह फंसे हुए हैं। विरोधाभास: त्याग का उपदेश देने वाले इन गुरुओं की अपनी बड़ी महत्वाकांक्षाएं हैं सादगी का पाठ पढ़ाने वाले ये आधुनिक संत आज हजारों करोड़ की संपदा के मालिक बने बैठे हैं। राजनीति और समाज सेवा का गिरता स्तर: रही बात राजनीतिज्ञों की, तो उनकी स्थिति और भी चिंताजनक है। समाज सेवा के पवित्र नाम पर राजनीति में कदम रखने वाले लोग आज दे...

आधुनिक लंका और मौन के 'विभीषण' - अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों , रामायण का एक शाश्वत सत्य यह है कि सत्य और निष्ठा किसी कुल या संगठन की बपौती नहीं होते।  राक्षसों के बीच रहकर भी विभीषण ने राम-नाम की लौ जलाए रखी। वे लंका के अनुशासन में तो थे, लेकिन उनका विवेक रावण के अहंकार का बंधक नहीं बना।  आज के दौर में जब हम राजनीतिक और सामाजिक संगठनों, विशेषकर संघ परिवार के भीतर के परिदृश्य को देखते हैं, तो इतिहास की वह उपमा आज के 'मौन' पर बिल्कुल सटीक बैठती है। आज संगठन के भीतर ऐसे कई लोग हैं जो दिल से रामभक्त हैं—वे राम के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि राम के आदर्शों (त्याग, मर्यादा और करुणा) को जीते हैं। लेकिन विडंबना देखिए, आज की 'चमक-दमक वाली लंका' में ये सच्चे भक्त गुमसुम हैं। उनका यह मौन डर का नहीं, बल्कि एक गहरे आंतरिक द्वंद्व का है।  जब सत्ता की चकाचौंध में मर्यादाओं की आहुति दी जाने लगे, तो निष्ठावान कार्यकर्ता का चुप हो जाना स्वाभाविक है। वे देख रहे हैं कि जिस राम के नाम पर जीवन समर्पित किया, आज उसी नाम को एक राजनीतिक नारे में बदला जा रहा है।  आज के ये 'विभीषण' अभी चुप हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि जब रावण की लंका में विभी...

समाज सेवा का मुखौटा और राजनीति का स्याह सच: क्या इस गंदगी का कोई इलाज है ? अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों,    आज हमारे समाज में एक बहुत ही अजीब और दुखद चलन देखने को मिल रहा है। जब भी कोई व्यक्ति राजनीति में कदम रखता है, तो उसका सबसे पहला बयान होता है— "मैं समाज सेवा के लिए, देश की भलाई के लिए राजनीति में आ रहा हूं।"   लेकिन आज का आम नागरिक यह अच्छी तरह जानता है कि इस वाक्य के पीछे कितनी बड़ी सच्चाई है और कितना बड़ा ढोंग।  राजनीति के माध्यम से जनसेवा का दावा करने वाले अधिकांश लोगों के लिए यह सेवा सिर्फ एक मुखौटा है, जिसके पीछे सत्ता और पैसे की हवस छिपी होती है। सेवा के नाम पर पद और प्रतिष्ठा : इन तथाकथित समाजसेवियों का वास्तविक और इकलौता लक्ष्य किसी भी तरह किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी में कोई ऊंचा पद हासिल करना होता है।  इसके बाद शुरू होती है चुनाव लड़ने के लिए टिकट पाने की होड़। जोड़-तोड़ और तिकड़म लगाकर यदि ये चुनाव जीत जाएं और विधायक या सांसद बन जाएं, तो इनका असली चरित्र सामने आता है।  सोने पर सुहागा तब होता है, जब इन्हें कोई मंत्री पद हाथ लग जाता है। इसके बाद जनता की सेवा तो फाइलों में दब जाती है और शुरू होती है इनकी अपनी "मौज-मौज" और जनता को लूटने का ख...

आस्था, अधिकार और वर्चस्व की नई अयोध्या— अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, मेरा यह स्पष्ट और दृढ़ मानना रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर के भव्य निर्माण की घोषणा से लेकर उसके बनने, मूर्ति स्थापना और पूजा-अर्चना तक का पूरा घटनाक्रम एक अलग ही दिशा में मुड़ चुका है। राम मंदिर, जो कि मूल रूप से एक जन-आस्था का केंद्र है और जिससे करोड़ों हिंदुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है, वह अब दुर्भाग्य से भारतीय जनता पार्टी (BJP), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मंदिर बनकर रह गया है। मैं इसके निर्माण के समय से ही लगातार यह कहता आ रहा हूं कि यह मंदिर अब आम हिंदुओं का मंदिर या उनकी स्वतंत्र आस्था का केंद्र नहीं रहा। यह परिसर अब देश में निर्मित अनेक अन्य आधुनिक मंदिरों—जैसे अंग्रेजों के इस्कॉन (ISKCON) टेंपल या गुजराती समाज के अक्षरधाम मंदिरों की तर्ज पर—विशुद्ध रूप से संघ परिवार और भाजपा का मंदिर हो गया है, जो उनके लिए राजनीतिक और अन्य लाभ का एक जरिया साबित हो रहा है।  संभव है कि कुछ लोगों या संगठनों को मेरी यह बात अप्रिय लगे, लेकिन वर्तमान का यथार्थ यही है। आज जिस तरह से अयोध्या और श्री राम मंदिर से जुड़ी खबरें सामने आ रही हैं—चाहे वे चढ़ाव...

प्रधानमंत्री मोदी संकट को 'राष्ट्रहित' का चोला पहनाकर जनता के सामने पेश करने के माहिर खिलाड़ी हैं: अभिमन्यु गुलाटी

चुनावों से पूर्व सब चंगा सी....और चुनावों के बाद....? पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा खाड़ी युद्ध के हालातों के चलते एक साल सोना नहीं खरीदने एवं खाने के तेल सहित ईंधन की बचत करने की भावानात्मक अपील पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा चुनावों के दौरान 'लोकलुभावन' माहौल और 'सब चंगा सी' वाली छवि बनाई गई, लेकिन परिणाम आते ही उनके कड़वे फैसलों का दौर शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि काश सरकार और बीजेपी संगठन अपने अनाप-शनाप के खर्चों सहित चुनावों में जीत हासिल करने, विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए हज़ारों-हज़ार करोड़ रुपया खर्च करने से खुद को रोक लेती तो शायद बेहतर होता।  गुलाटी ने कहा कि यह कितना हास्यास्पद है कि पांच राज्यों के चुनाव और उसमें खर्च किए गए बेहिसाब धन सहित देश के तमाम संसाधनों की बर्बादी के बाद साहेब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को याद आया कि देश में तेल सहित विदेशी मुद्रा भंडार की कमी हो रही है। और वे मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते उपजे संकट से अवगत करवाने सहित देशवासियो...

पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे, TMC नेता ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों , पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी और ममता बनर्जी की पार्टी TMC का सत्ता से बेदखल होना,  देश की बाकी अन्य सभी पार्टियों के लिए सबक है कि देश का बहुसंख्यक हिन्दू समाज अंधा नहीं है, यदि आप तुष्टीकरण की राजनीति करोगे तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इसका फ़ायदा उठायेगी ही उठायेगी। और उठाए भी क्यूं न ? कल बंगाल के मतदाताओं ने देश की तमाम बाकी राजनीतिक पार्टियों को स्पष्ट संदेश दे दिया कि यदि जीतना है तो निष्पक्षता का ड्रामा करके एक पक्ष के प्रति ज़्यादा वफ़ादार होने से काम नहीं चलेगा, आपको बाकायदा पक्षपाती होकर देश के 80% बहुसंख्यक हिन्दू समाज के साथ खड़े होना ही पड़ेगा।  फिर यही 80% हिन्दू समाज, 20% का भी खयाल रखेगा, उन्हें किसी चीज़ की तकलीफ़ नहीं होने देगा।  लेकिन आप 20% को ही सब कुछ मानकर राजनीति करेंगे तो ये 80% आपको तकलीफ़ देने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाएगा। कल के बंगाल चुनाव के नतीजे तो शायद इसी और इशारा करते हैं। "डेमोक्रेसी तो डेमोग्राफी से ही चलती है"! "बंगाल में केवल सत्ता परिवर्तन, भाजपा की प्रचंड जीत या TMC की हार की दृष्टि से न देखकर यह समझना होगा कि ...

"We are the party with a difference" की बात करने वालों का "चाल-चरित्र और चेहरा" 2014 के बाद सबके सामने उजागर हो गया: अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, एक ज़माना ऐसा भी था जब भाजपा वाले यह कहते नहीं थकते थे कि "We are the party with a difference"! जब वर्ष 2014 के मई माह में, पूर्ण बहुमत की सरकार इनके हाथ लगी, उसके बाद से इनका भी "चाल-चरित्र और चेहरा" सबके सामने उजागर हो गया।  इनके चेहरे से नकाब उतर गया। अब सवाल उठता है कि हम करें भी तो क्या करें ? शायद सत्ता का चरित्र ही कुछ ऐसा है! "Party with a difference" का नारा वाकई भाजपा की पहचान रहा है, लेकिन 2014 के बाद के सफर ने कई सवाल खड़े किए हैं। 1- आदर्श बनाम यथार्थ:  विपक्ष में रहते हुए सिद्धांत और नैतिकता की बातें करना आसान होता है, लेकिन जब पूर्ण बहुमत की सत्ता हाथ में आती है, तो 'रियल पॉलिटिक्स' (Real Politics) यानी व्यावहारिक राजनीति हावी हो जाती है। 2- सत्ता का चरित्र:  शायद सत्ता का स्वभाव ही ऐसा है कि वह अंततः चेहरों पर से नकाब हटा देती है।  जब संसाधनों और नियंत्रण की ताकत मिलती है, तो पुरानी पार्टियों और नई पार्टियों के बीच का अंतर धुंधला होने लगता है। 3- जनता की दुविधा:  "अब करें भी तो क्या करें?" —यह आज के ...

कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा मूल्य वृद्धि पर गुलाटी ने केन्द्र की मोदी सरकार को असंवेदनशील करार दिया।

नई दिल्ली:  पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने आज केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा वृद्धि की तीखी और कटु आलोचना की है। आज प्रेस सहित अपने ब्लाग पर जारी बयान में गुलाटी ने कहा कि फरवरी 2026 में कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में ₹ 1,740.50 हुआ करती थी। जो आज बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव निपट जाने के बाद 1 मई 2026 को बढ़कर ₹ 3,071.50 हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गैस के दामों में ₹ 993 की बेतहाशा वृद्धि जोकि 76% है। इस बात का संकेत है कि उसकी इन कंपनियों के साथ सांठ-गांठ है और उसने तेल और गैस कंपनियों को आम आदमी को लूटने, उनकी जेब पर डाका डालने की की खुली छूट दे दी है।  गुलाटी ने कहा कि पहले से ही ज़बरदस्त महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी की सरकार के इस कदम से कमर टूटना निश्चित है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने निश्चित रूप से वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है, लेकिन घरेलू स्तर पर इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर छोटे व्यापारि...

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को मुंह और दिमाग में बवासीर का रोग हो गया है : अभिमन्यु गुलाटी

नई दिल्ली: पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के संस्थापक अध्यक्ष, अभिमन्यु गुलाटी ने आज प्रेस सहित सोशल मीडिया एवं अपने ब्लाग पर जारी एक बयान में अमरीका के सिरफिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लगता है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मुंह और दिमाग में बवासीर का रोग हो गया है। गुलाटी ने कहा कि उन्हें ट्रम्प को अमरीका के किसी अच्छे डॉक्टर से अपनी इस बीमारी का इलाज करवाना चाहिए। श्री गुलाटी का उपरोक्त तल्ख बयान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है जिसमें ट्रम्प ने 140 करोड़ भारतीयों का अपमान करते हुए भारत को नरक का गड्ढा कहा है। ट्रम्प यहां ही नहीं रुके, उन्होंने वर्षों से अमरीका में रह रहे भारतीयों जोकि वहां के IT क्षेत्र सहित अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं को "लेपटॉप वाले गुंडे" कहकर संबोधित किया। ट्रंप इतने पर ही नहीं रुका उसने कहा कि वहां रहने वाले भारतीय अमरीका में बच्चा पैदा कर उसके सहारे से अमरीकी नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं और फिर अपने पूरे खानदान को भी अमरीका बुला लेते हैं...

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते आए संकट से निपटने के लिए अपनी सरकार का मजबूती से सहयोग करें। अभिमन्यु गुलाटी

मित्रों, आज जैसे हालात हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में माना है कि 'मध्य पूर्व में इज़रायल-अमरीका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में भारत के समक्ष भी 'अप्रत्याशित चुनौतियां' हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान संकट पर आज सोमवार देश की संसद को संबोधित करते हुए कोरोना काल का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को तैयार रहने की ज़रूरत है। मित्रों, मेरा मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए हमें अपने सभी वैचारिक मतभेद भुलाकर मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते आए संकट से निपटने, उससे जूझने के लिए अपनी सरकार का मजबूती से सहयोग करना चाहिए और जिस तरह से हमने कोरोना से जंग लड़ी थी, उसी तरह से इस संकट से भी जीतना है। मेरा मानना है कि केन्द्र सरकार को रसोई गैस सिलेंडर की कमी को दूर करने के लिए कोयला एवं लकड़ी जैसे वैकल्पिक इंधन का प्रयोग करने की इज़ाजत दे देनी चाहिए। साथ ही सड़कों पर अनावश्यक दौड़ रही प्राइवेट कारों (वाहनों) के चलन पर रोक लगाकर, इलैक्ट्रिक वाहनों, बसों सहित रेलगाड़ियों और मेट्रो जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इस्तेमाल करने उसे प्रोत्साहन देने का सख्त आदेश जारी कर...

युद्ध से पैदा हो रहे ऊर्जा संकट से बचने के लिए सरकारें अपने बेफिज़ूल के खर्चों, इंधन के प्रयोग पर लगाम लगाएं। अभिमन्यु गुलाटी

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध  से पैदा हो रहे संकट से बचने का एक उपाय यह भी है कि सरकार, चाहे वो केन्द्र की हो या फिर राज्यों की, अपने बेफिज़ूल के खर्चों, इंधन के प्रयोग पर लगाम लगाए। साथ ही पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों को संसद में अध्यादेश लाकर स्थगित करे। और फिलहाल जो सरकारें राज्यों में काम कर रहीं हैं उनका कार्यकाल, स्थिति सामान्य होने तक बढ़ा दिया जाए।

भारत के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं इस्लामिक कट्टरपंथी...!

भारत में न तो इस्लाम और न ही उसको मानने वालों पर कोई खतरा है, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथी मुसलमान जरूर भीतर ही भीतर भारत के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। मैंने महसूस किया है कि भारत में कुछ  मुसलमान जो कि मज़हबी कट्टरता का लबादा ओढ़े हैं सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे, उनकी सहानुभुति भारत के साथ कम इस्लामिक राष्ट्रों के साथ कुछ ज़्यादा है। कहते हैं कि फिलिस्तीन ज़िन्दाबाद... ठीक है भाई, फिलिस्तिन जिन्दाबाद कोई बात नहीं.... खूब बोलो खूब हमदर्दी जताओ। लेकिन उन्हें भारत माता की जय बोलने और वन्दे मातरम् बोलने से चिड़ मचती है... छाती ठोक कर कहते हैं कि नहीं बोलेंगे.... और यदि आप उन्हें कहें कि भारत माता की जय नहीं बोलोगे तो किसी इस्लामिक देश की नागरिकता ले लो और वहां चले जाओ...; सीना ठोककर कहते हैं कि वहां भी नहीं जाएंगे। मतलब साफ है कि वो भीतर ही भीतर भारत के बहुसंख्यक हिन्दू समाज  के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। उनके मंसूबे कुछ और ही बयान कर रहे हैं।  इस तरह के लोग अपने मादर-ए-वतन से प्रेम करने वाले अमनपसंद मुसलमानों के भी कट्टर दुश्मन हैं। जो मुसलमान अपने मादर-ए-वतन के प्रति प...

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर POK में चल रही आतंकवाद की फैक्ट्रियों के सामूल नाश का समय आ गया है: अभिमन्यु गुलाटी

नई दिल्ली 24 अप्रैल : पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने अपने ब्लाग के माध्यम से प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी से "आतंकवाद के पोषक राष्ट्र पाकिस्तान" से सभी तरह के संबंध खत्म करने की मांग की है। गुलाटी ने कहा कि कश्मीर घाटी के पहलगाम में निर्दोष और मासूम पर्यटकों पर कायराना हमला कर पाकिस्तान देश के 140 करोड़ लोगों को आंखे दिखा रहा है जिसे कोई भी स्वाभीमानी सरकार या जनता कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि हम सब यह जानते हैं की पकिस्तान हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकता; पूर्व के युद्धों के परिणामों को शायद वह भूल गया है। गुलाटी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपने ब्लॉग के माध्यम से कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तान को उसकी नापाक हरकतों के लिए दण्डित कर पाक अधिकृत कश्मीर POK में चल रहे आतंकवाद के कारखानो को नष्ट  किया जाए, और उसे सबक सिखाया जाए। गुलाटी ने कहा की  राष्ट्रहित में पकिस्तान के साथ  सभी तरह के राजनीतिक, कूटनीतिक, व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को ख़त्म  कर उसे आतंकवादी राष्ट्र घोषित करवाने के लिए विश्व मंच पर UNO में...

गुलाटी ने पंजाब के अमृतसर में डॉ. भीम राव अम्बेडकर की मूर्ती पर हथौड़े मारने की घटना पर अपना जबरदस्त रोष प्रकट करते हुए भगवंत मान सरकार की बर्खास्तगी की मांग की।

नई दिल्ली: #पंजाब के अमृतसर में संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति पर चढ़, हथौड़े मारने की घटना पर पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने जबरदस्त रोष प्रकट करते हुए इस घटना के लिए पंजाब की आम आदमी पार्टी #AAP की भगवंत मान सरकार को आड़े हाथों लिया है। गुलाटी ने आज अपने कार्यालय से प्रेस सहित सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि जिस दिन से पंजाब में केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी AAP की भगवंत मान सरकार सत्ता में आई है उसी दिन से पंजाब में राष्ट्र विरोधी शक्तियां बेलगाम हो गई हैं और पंजाब की भगवंत मान सरकार मूक दर्शक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि #अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर की ओर जाने वाली हेरिटेज स्ट्रीट पर टाउन हॉल में दिनदहाड़े डॉ. भीम राव अम्बेडकर की प्रतिमा को नुक़सान पहुंचाने की इस घटना के पीछे राष्ट्र विरोधी शक्तियों का हाथ है जो देश के अमन-चैन को भंग करना चाहते हैं। गुलाटी ने कहा कि अपने कार्यालय में कुर्सी के पीछे संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. #भीमराव_अम्बेडकर का चित्र लगाने वाले केजरीवाल में यदि तनिक भी नैतिकता बची है तो इस घट...

नेता अपने पद का उपयोग जनहित में करें न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए - अभिमन्यु गुलाटी

पीपुल्स राइट्स फ्रंट (P.R.F) के प्रमुख अभिमन्यु गुलाटी ने आज अपने कार्यालय से प्रेस सहित सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आज की राजनीति और राजनीतिज्ञों के आचरण को लेकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनैतिकता और स्वार्थपरता से बहुत निराश हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति आज एक समाज सेवा का माध्यम ना रहकर विशुद्ध व्यवसाय बन गई है।  आज लोग राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को अच्छी दृष्टि से नहीं देखते। राजनीति आज एक ऐसा क्षेत्र है जहां व्यक्ति को अपनी आत्मा को बेचना पड़ता है और अपने मूल्यों को त्यागना पड़ता है। गुलाटी ने अपने बयान के माध्यम से तमाम राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े नेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने पद का उपयोग जनहित में करें, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।   गुलाटी ने राजनीति में ईमानदारी और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि नेता अपने पद का उपयोग जनहित में करें और राजनीति को एक सकारात्मक दिशा में ले जाएं ।

" खून बेचने के लिए नहीं होता है"। केन्द्र सरकार के बल्ड बैंकों सहित अस्पतालों के लिए आए नये दिशा-निर्देशों का गुलाटी ने स्वागत किया।

नई दिल्लीः पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के अध्यक्ष और देश की राजधानी दिल्ली में, रक्तदान के क्षेत्र में विगत् 30 वर्षों से सक्रिय, स्वयं 110 बार रक्तदान कर चुके, "अटल रक्तदान अभियान" के संयोजक अभिमन्यु गुलाटी  ने केन्द्र सरकार के औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा निजी एवं कुछ सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट ब्लड बैंकों द्वारा ब्लड देने के बदले, मरीजों के परिवारजनों से मोटी रकम वसूलने के ऊपर लगाम कसने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए अपनी चिन्ता भी व्यक्त की है। गुलाटी ने का कि केन्द्र सरकार के कल आए इस नए फैसले के बाद ब्लड बैंक या अस्पताल से खून लेने पर अब प्रोसेसिंग शुल्क के अलावा किसी भी तरह का कोई अन्य चार्ज नहीं लगेगा। जिसके चलते रक्त की जरूरत वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को कुछ राहत मिलेगी। गुलाटी ने कहा कि केन्द्र सरकार के औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने कल यह स्पष्ट निर्देश जारी किया है और कहा है कि " खून बेचने के लिए नहीं होता है"।  उन्होंने कहा कि तमाम निजी अस्पताल एवं निजी बल्ड बैंक...

क्या यही थी, मदनलाल खुराना और शीला दीक्षित की दिल्ली ?

आज यदि मदनलाल खुराना जी या शीला दीक्षित जी, जीवित होते तो हमारी दिल्ली को यह दिन ना देखने पड़ते। खुराना जी तो दिल्ली को अपना मन्दिर और खुद को उसका पुजारी मानते थे और काम भी करते थे। दिल्ली के विकास और जरूरतों के लिए यह दोनों ही नेता तब भी केन्द्र से भिड़ जाया करते थे। चाहे सरकार किसी भी दल की क्यूं ना रही हो।  आज दिल्ली में जो भी विकास आपको दिखाई देता है। चाहे वो मेट्रो रेल हो, पुल हों, सड़कें हों और उनके नीचे अंडरपास या फिर CNG से चलने वाली पब्लिक ट्रॉंसपोर्ट या अन्य निजी वाहन। सब इन दोनों दिग्गज नेताओं की देन हैं। वर्तमान की दिल्ली की अत्यधिक बहुमत वाली केजरीवाल और केन्द्र की अत्यधिक बहुमत वाली मोदी सरकार की हठधर्मिता, और बदले सहित आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति ने दिल्ली का बेड़ा-गर्क करके रख दिया है। आज कई बार ऐसा लगता है कि हम लोग देश की राजधानी दिल्ली में ना रहकर बिहार के किसी पिछड़े हुए जिले के निवासी हों। आज कोविड_19 कोरोना महामारी की दूसरी खतरनाक लहर के बीच में इन दोनों ही सरकारों के आपसी झगड़े और महामारी में भी नाम कमाने और अपनी छवि बनाने की होड़ ने दिल्ली को ऑक्सीजन के अभाव में श्म...

कोरोना को लेकर जिस तरह की लापरवाही देखी जा रही है वह गंभीर संकट को आमंत्रित करने वाली है: अभिमन्यु गुलाटी

अब कोई नहीं आएगा बचाने...अपनी लड़ाई स्वयं लड़नी पड़ेगी। इसलिए हो जाएं सावधान। मित्रों,  महाशिवरात्रि पर गत दिवस हरिद्वार में कुम्भ का शुभारम्भ शाही स्नान के साथ शुरू हो गया है। इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों की भीड़ हरिद्वार में उमड़ेगी।  कुम्भ मेला भारत के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है लेकिन ये आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब देश में कोरोना की दूसरी लहर ने जोरदार दस्तक दे दी है। गत् दिवस 22 हजार से भी ज़्यादा नए मामले आये हैं जबकि स्वस्थ होकर अस्पतालों से लौटने वालों की संख्या काफ़ी कम है।  केरल, गुजरात और महाराष्ट्र से भी चिन्ताजनक खबरें बराबर आ रही हैं। पूरे देश से लोग कुम्भ में आयेंगे। वहीं असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के कारण कोरोना से बचाव के प्रति वैसे भी लोगों सहित नेताओं और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में लापरवाही देखी जा रही है।  'मास्क' और शारीरिक दूरी की सलाह की  पूरी तरह उपेक्षा की जा रही है।  ...

"अटल रक्त अभियान" के पूरे हुए 26 वर्ष: अभिमन्यु गुलाटी

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री, युग पुरुष, भारत  रत्न, श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जन्म जयन्ती 25 दिसम्बर के अवसर पर, पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के तत्वावधान में "अटल रक्त अभियान" 2020 का सफल आयोजन, देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के शाहदरा क्षेत्र स्थित डी०डी०ए० फलैट्स, मानसरोवर पार्क में किया गया।  COVID-19 कोरोना काल के बावजूद युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ लाइन में लगकर, घंटों अपनी बारी का इन्तज़ार करते हुए रक्तदान किया। इस सफल कार्यक्रम का आयोजन पीपुल्स राइट्स फ्रन्ट (P.R.F) के संस्थापक प्रमुख, अभिमन्यु गुलाटी ने किया। प्रेस सहित सोशल मीडिया एवं अपने ब्लॉग पर जारी एक बयान में  उन्होंने कहा कि वे विगत् 26 वर्षों से 'रक्तदान 'के क्षेत्र में सक्रिय हैं। स्वयं भी रक्तदान का शतक बना, 102 बार रक्तदान कर चुके गुलाटी ने कहा कि कोविड-19 महामारी, कोरोना काल में आज देश की राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम सरकारी एवं निजी अस्पताल एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं के ब्ल्ड बैंक स्वयं ख़ून की कमी का शिकार हो गए हैं।  उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ख़ू...